बाउंस रेट क्या है ? और उसे कैसे कम करे

 

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What is Bounce rate   

अगर आप इसके बारे में नहीं जानते तो कोई बात नहीं इस पोस्ट में आप इसके बारे में पूरी तरह से जान जाएंगे

साथ ही यह जान पाएंगे कि Bounce rate कम कैसे करें अगर आप का कोई ब्लॉ है या बेवसाइट है तो आप बाउंस रेट के बारे में थोड़ा कुछ तो जरूर जानते होंगे

अगर आप alexsa में अपने ब्लॉग का ग्लोबल रैंक, इंडिया रैंक ,पेज पर विजिटर चेक करते हैं तो इनके साथ आप बाउंस रेट भी जरूर चेक करते होंगे

एक ब्लॉगर को तब बहुत परेशानी होती है जब उसका बाउंस रेट एवरेज से ज्यादा होता है बाउंस रेट ज्यादा होने की वजह से ब्लॉग की अथॉरिटी और रेंक गिरने लगता है क्योंकि किसी भी साइट का बाउंस रेट ज्यादा होना मतलब वह साइट यूजर्स के लिए अच्छी नहीं मानी जाती

और आपका बाउंस रेट ज्यादा है इसका मतलब है कि आपकी साइट भी  इसी कैटेगरी में आता है ये आपकी वेबसाइट के लिए अच्छी खबर नहीं है

 

अगर आपने नया नया शुरुआत किया है ब्लॉगिंग का तो साइट का बाउंस रेट का ज्यादा होना कोई बड़ी बात नहीं है

यह आम बात है लेकिन अगर पुराना है तो बाउंस रेट ज्यादा होना आपके लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है

 

लेकिन अगर आपका बाउंस रेट ज्यादा है तो फिर भी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि

इस पोस्ट में आपको बाउंस रेट कम करने के टिप्स एंड ट्रिक्स मिलेंगे जिसकी मदद से आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट  का जो बाउंस रेट है उसे कम कर सकते हैं

बाउंस रेट क्या है |What is Bounce rate

बाउंस रेट जब एक विजिटर आपके वेबसाइट में आता है और अपने के मतलब इंटरेस्ट पेज को विजिट करता है और वह उसके बाद वापस वहां से चला जाता है तो इसी को बाउंस बोला जाता है

बाउंस रेट विजिटर्स का परसेंटेज है जो आपके पेज पर आते हैं और कोई दूसरे पेज पर क्लिक किए बिना ही वापस चले जाते हैं इसका मतलब यह भी हो सकता है की  विजिटर आते हैं और तुरंत वापस चले जाते बिना किसी दूसरे पेज को खोले बिना किसी आर्टिकल को पढ़ें और ऐसा हो रहा है तो इसका मतलब है कि आपकी जो साइट की पोस्ट है इतने इंटरेस्टिंग नहीं है या फिर  वैल्यूबल नहीं है जिससे कि विजिटर ज्यादा टाइम तक आपके साइट पर टाइम स्पेंड करें

इसके अलावा यह भी हो सकता है कि आपकी जो डिजाइनिंग है वह भी कुछ अच्छी नहीं है हेडिंग अट्रैक्टिव नहीं है अगर बाउंस रेट ज्यादा है तो आप को समझना चाहिए कि साइट के विजिटर कम हो रहे हैं और अगर विजिटर कम हो रहा है तो रैंक भी कम हो जाएगी और आपका इनकम भी कम होगा

what is bounce rate on google analytics

इसे एक उदाहरण  से समझे तो  अगर 65 % बाउंस रेट  है तो 65 लोग ऐसे है साइट पर आते है और चले जाते ।

 

बाउंस रेट कितना होना चाहिए | what is a good bounce rate

 

इस तरह से आपको अब कुछ आईडिया हो गया होगा कि बाउंस रेट क्या होता है

अब आप आगे जानेंगे कि बाउंस रेट कितना होना अच्छा होता है

इसे समझने के लिए इसे 4 स्टेप में समझते हैं

1 1% से 10 %

2 10% से 40 %

3 40 % से 70 %

4 70% से ज्यादा

पहला  1 %  से 10 परसेंट के अंदर जो ब्लॉग  आते हैं  वह बहुत ही कामयाब वेबसाइट होते हैं

दूसरा जो 10 से 40%  में आते है वह भी बहुत ही अच्छे माने जाते हैं

तीसरा  जो 40 से 70%  के बीच मे आते है इसमें ज्यादातर वेबसाइट शामिल होती है ये इतनी भी अच्छी नहीं है लेकिन इस से काम चलाया जा सकता है

चोथा 70 से 80 % वैबसाइट इसी कैटेगरी मे आते है

70% से ज्यादा बाउंस रेट  है तो आपको बहुत ज्यादा काम करना पड़ेगा अपनी गलतियों को पहचानना होगा कि क्यो बाउंस रेट ज्यादा हो रहा है।

 

इसमें यह जानना भी जरूरी है की बाउंस रेट समान नहीं होते  अलग-अलग वेबसाइट के लिए बाउंस रेट अलग-अलग होते हैं आप इसे कुछ आंकड़ों की मदद से समझ सकते हैं

1 कंटेंट वाली वेबसाइट 40 से 60%

2 लीड जनरेट करने वाली वेबसाइट 30 से 50%

3 ब्लॉग 70 से 98%

4 रिटेल कारोबार 40%

5 कोई सर्विस प्रोवाइडर वैबसाइट 10 से 30%

6 लैंडिंग पेजेस  70 से 90%

 

किन गलतियों की वजह से वेबसाइट या ब्लॉग के बाउंस रेट ज्यादा बढ़ जाता है what is bounce rate on google analytics

1 वेबसाइट का लोडिंग टाइम ज्यादा होना

2 सिंगल पेज साइट  का होना

3 खराब क्वालिटी के कंटेन्ट  का होना

4 इंटरनल लिंकिंग विजिटर को पसंद ना आना

5 ट्रैफिक के लिए गलत कीवर्ड पर रैंक करना

6  क्वालिटी और विजिटर को पसंद आने वाली कंटेन्ट  न होना

7 आप की वेबसाइट की डिजाइन बेकार होना फॉर्मेटिंग का खराब होना

8 आपके कंटेन्ट की हेडिंग खास ना हो ना

 

बाउंस रेट को कम कैसे करें | how to reduce bounce rate

                                     

1 साइट डिजाइन और लूक अच्छा होना चाहिए

जब कोई चीज दिखने में अच्छी लगती है तो उसका जो अट्रैक्शन है वह ऑटोमेटिक ध्यान खींचता है तो जब तक आपकी वेबसाइट या ब्लॉग का जो कंटेंट और डिजाइन है वह अट्रैक्टिव नहीं रहेगा तब तक पढ़ने वाले को अच्छा नहीं लगेगा

अगर आप ब्लॉग मे डिजाइनिग कर रहे हैं तो आपको कलर कॉन्बिनेशन पर पूरा काम करना होगा विजिटर के हिसाब से आपको कलर का चुनाव करना होगा फोंट और टेक्स्ट साइज का भी चयन आपको बहुत ही ध्यान से करना होगा

इसका मतलब यह भी नहीं कि आप साइट में एनिमेशन बहुत ही ज्यादा डाल दे साइट का डिजाइन सिंपल और रीडर्स फ्रेंडली होना चाहिए।

 

2 पेज लोडींग टाइम पर ध्यान दें

अगर आपका जो पेज लोडींग टाइम है वह बहुत ही ज्यादा है तो विजिटर ज्यादा टाइम तक नहीं रुकेंगे इसके लिए आप पेज लोडिंग टाइम पर ध्यान दें अगर साइट का पेज लोड टाइम

1 सेकंड से कम है मतलब बहुत ही परफेक्ट है

1 सेकंड से 3 सेकंड के बीच है तो एवरेज है

और 3 सेकंड से 7 सेकंड है मतलब थोड़ा उतना ज्यादा अच्छा भी नहीं है

ऑर अगर  7 सेकंड से ज्यादा है इसका मतलब बहुत ही पुअर है

इसे ध्यान रखते हुए आपको परफेक्ट या फिर एवरेज रखें पेज में लिमिटेड इमेज और इमेज साइज का ध्यान रख कर इस्तेमाल करें इससे  पेज लोडींग टाइम कम होगा।

 

3 कंटेंट क्वालिटी वाला लिखें

अगर आपके साइट में क्वालिटी वाले कंटेंट हैं तो आपकी जो साइट है वह एक ब्रांड के रूप में उभर कर आती है और ब्रांडेड और वैल्यूबल कंटेन्ट पर ज्यादा ध्यान देते हैं तो आप वाहा पहोच सकते है जहा आप पहोचना चाहते है

और इस तरह की क्वालिटी वाले कंटेंट रीडर को भी पसंद आते हैं साथ ही वेबसाइट गूगल में जल्दी रैंक कर जाते हैं

अगर आप अच्छे कंटेंट लिख रहे हैं और वहां पर सही इंफॉर्मेशन दे रहे हैं तो इससे जो साइट का वैल्यू है वह बढ़ेगा आप कंटेंट का जो साइज है 500 से 1000 वर्ड रखें सिंपल भाषा का इस्तेमाल करें जिससे कि रीडर को समझने में बहुत आसानी हो इससे बाउंस रेट कम होने में मदद मिलेगी ।

 

4 विजिटर्स फ्रेंडली हेडिंग डालें

हेडिंग डालते समय ध्यान रखें कि जो आप हेडिंग में बता रहे हैं वहीं कंटेन्ट के अंदर हो ब्लॉगर्स ज्यादातर clickbait हेडिंग्स का इस्तेमाल करते हैं जो कि सही नहीं होता

ब्लॉग मे आप लिंक जो दिये हैं वह हेडिंग अच्छा दीजिए अपने हिसाब से विजिटर को समझ में आ रहा है कि नहीं यह इस बात का आप ध्यान रखें इससे विजिटर्स का आप पर भरोसा बनता है

इससे साइट को जो बाउंस रेट है वह कम होगा क्योंकि आर्टिकल के हेडिंग को पढ़ने के बाद वह दूसरे आर्टिकल पर  जाएगा

ऑर कंटेंट अपडेट करते रहे जिससे कि सही इंफॉर्मेशन विजिटर को मिले अच्छे कंटेंट की वजह से गूगल भी बहुत ही जल्दी आर्टिकल को रैंक करता है।

 

5 कंटेंट फॉर्मेटिंग पर फोकस करें

आप जितने अच्छे से लिख रहे हैं उतना ही अच्छे से आपको उसको स्टेप बाय स्टेप फॉर्मेटिंग करके रखें पेज पर अगर अलग-अलग आप पोस्ट य पैराग्राफ को रखेंगे तो विजिटर्स को समझने में परेशानी होगी  पोस्ट मे टैग डालते समय  ध्यान रखें पैराग्राफ फॉर्मेटिंग पर थोड़ा फोकस करें ज्यादा लंबा पैराग्राफ ना लिखें जिससे कि विजिटर्स बोर ना हो word  को बोल्ड करें जिससे फोकस बढ़ता है।

 

6 इंटरनल लिंक पर फोकस डाले  

अगर आपके पोस्ट के बीच मेंर आपने इंटरनल लिंक किया है तो जो रीडर है उसको क्लिक करके दूसरे आर्टिकल पर जाते हैं

तो वह आर्टिकल उनके काम का होना चाहिए यह जरूर ध्यान रखें जिससे कि जो रीडर है वह आपके साइट में ज्यादा टाइम तक टाइम स्पेंड करेगा और इससे आपका जो बाउंस रेट है वह कम होगा यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आपके साइट में कौन सा कंटेंट है और इंटरनल लिंक कौन सा आप  करते हैं

यह भी ध्यान रखे की आर्टिकल दूसरे टैब मे खुले ,कहने का मतलब आप जो लिंक लगाए है वह दूसरे पेज मे खुले

7 मोबाइल फ्रेंडली ब्लॉग

जैसे कि आजकल सभी यह जानते हैं कि आजकल हर कोई मोबाइल का इस्तेमाल करता है और किसी भी जानकारी को ढूंढने के लिए मोबाइल का ही उपयोग करता है तो आपका  आर्टिकल मोबाइल फ्रेंडली है तो वह आपके साइट के बाउंस रेट को भी कम करने में बहुत ज्यादा मदद करता है।

 

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